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स्त्री और पुत्र, मित्र और बांधव जीवित व्यक्ति के साथ जीते हैं- जीते-जागते तक के ही साथी हैं। मरने पर इनमें से कोई साथ नहीं जाता। - आचार्य श्री रामलाल जी म.सा.
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