Since 1962
जो इन्दि्रय के विषयों से विरक्त होता हुआ मन को प्रिय लगने वाले भोग्य पदार्थों से आत्मा को सदा दूर रखता है, उसे प्रकट रूप से संवर होता है। - आचार्य श्री रामलाल जी म.सा.
होम |     समाचार |     फोटो गैलेरी |     हमसे सम्पर्क करे |    पूर्व अध्यक्षगण |    डाउनलोड - प्रपत्र |    80जी एवं बैंकर्स |    संघ इतिहास |    श्रुतआराधक |    फीडबैक |    
भगवान महावीर एवं आचार्यजन
संघ
संघ प्रवृत्तियाँ
आचार्य उवाच
साहित्य निधि
समाज
हुक्मसंघ की चारित्र आत्माएँ
श्रमणोपासक
फोटो गैलेरी >




  

  
Category
City
हमसे सम्पर्क करे |    पूर्व अध्यक्षगण |    डाउनलोड - प्रपत्र |    80जी एवं बैंकर्स |    संघ इतिहास |    श्रुतआराधक |   

Copyright Shri A.B.S Jain Sangh Powered by KhabarExpress, Bikaner